राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए एक कथित हमले को लेकर सिविल जस्टिस पार्टी (सीजेपी) ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी के सदस्यों ने 23 जुलाई को हुए उस हमले के मामले में कड़ी कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है, जिसमें छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार घायल हुए थे।
सीजेपी का आरोप है कि इस मामले में आरोपियों में से एक व्यक्ति एक 'इन्फ्लुएंसर' है, जिसके खिलाफ पुलिस ने अब तक उचित कार्रवाई नहीं की है। पार्टी का कहना है कि हमले की गंभीरता को देखते हुए मामले में सख्त धाराएं लगाई जानी चाहिए और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच कराई जाए।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि संजय कुमार को सिर पर 'साधारण चोट' आई है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी तरह का कोई राजनीतिक दबाव नहीं है और जांच अपने सामान्य ढर्रे पर चल रही है। पुलिस के इस बयान से सीजेपी की नाराजगी और बढ़ गई है, क्योंकि पार्टी हमले को गंभीर मानती है और पुलिस की प्रतिक्रिया को पर्याप्त नहीं मान रही है।
बताया जाता है कि घटना जंतर-मंतर पर 23 जुलाई को हुई थी, जब निशु आजाद कथित तौर पर वहां एक प्रदर्शन में शामिल थीं। इसी दौरान उनके पिता संजय कुमार पर कुछ लोगों ने हमला किया था। इस घटना के बाद से ही यह मामला सुर्खियों में है और सीजेपी लगातार पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
गौरतलब है कि सिविल जस्टिस पार्टी ने पहले भी कई मौकों पर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का मानना है कि कुछ मामलों में पुलिस प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतराती है। इसीलिए इस मामले में भी पार्टी ने पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन कर अपनी मांगों को जोर-शोर से उठाया है।
सीजेपी की प्रदर्शन के दौरान पार्टी के सदस्यों ने नारेबाजी की और पुलिस के खिलाफ जमकर नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस ने मामले में उचित कदम नहीं उठाए तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाने पर भी विचार कर सकते हैं।
वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और जल्द ही सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उचित कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने इस बात से भी इनकार किया है कि किसी राजनीतिक पार्टी या प्रभावशाली व्यक्ति का इस मामले में कोई दबाव है। अधिकारियों ने कहा है कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बचने नहीं दिया जाएगा।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर दिल्ली में कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर बहस छेड़ दी है। जंतर-मंतर, जो कि अक्सर विभिन्न आंदोलनों और प्रदर्शनों का केंद्र रहा है, वहां इस तरह की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि एक व्यस्त और प्रतीकात्मक स्थल पर इस तरह की घटना कैसे हो सकती है।
सीजेपी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि वे इस मामले को लेकर अदालत में भी जा सकते हैं, अगर पुलिस की ओर से संतोषजनक कार्रवाई नहीं की जाती है। पार्टी ने यह भी कहा है कि वे पीड़ित परिवार को हरसंभव कानूनी मदद प्रदान करेंगे। निशु आजाद की ओर से भी इस मामले में पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक की गई कार्रवाई से वे संतुष्ट नहीं हैं।
फिलहाल, यह मामला दिल्ली पुलिस और सीजेपी के बीच एक नए विवाद का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और क्या सीजेपी अपने आंदोलन को और तेज करती है या नहीं।



