हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक जन्माष्टमी का पर्व आज शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। हजारों वर्षों से यह पर्व आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता रहा है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष जन्माष्टमी का शुभ दिन मनाने का मुहूर्त विशेष रूप से उत्तम माना गया है। भक्तजन सुबह से ही मंदिरों में एकत्रित होने लगे हैं और श्रीकृष्ण की प्रतिमाओं को विधि-विधान से स्थापित करने की तैयारी में जुटे हैं।
मथुरा, वृंदावन, द्वारिका और दिल्ली समेत देशभर के प्रमुख मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। झांकियों और फूलों से मंदिरों को सजाया गया है। कृष्ण भक्तों के लिए यह दिन बेहद खास है और वे रात भर जागरण करते हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषियों के अनुसार, इस वर्ष निशीथ मुहूर्त में जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मध्यरात्रि को विशेष पूजा का आयोजन होगा। भक्तगण मध्यरात्रि के समय भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मनाते हैं और तुरंत बाद शिशु कृष्ण की प्रतिमा को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाते हैं।
व्रत और पूजा विधि
जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने का विशेष महत्व है। सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिनभर भगवान का नाम जप और कीर्तन किया जाता है। संध्या के समय मंदिर में जाकर या घर में श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करके पूजा का आरंभ किया जाता है।
पूजा में मुख्य रूप से श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर, पीले और बैंगनी रंग के वस्त्र, माला, बेलपत्र, तुलसी, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी), फूल, नैवेद्य (लड्डू, पेड़ा, मक्खन, छोले-भटूरे) और दीये का प्रयोग किया जाता है। 'विष्णु सहस्रनाम' और 'श्रीमद्भगवद्गीता' का पाठ भी इस अवसर पर किया जाता है।
लड्डू गोपाल का भोग
जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को भोग लगाने की परंपरा है। कहते हैं कि श्रीकृष्ण को मक्खन और लड्डू बेहद प्रिय थे। मंदिरों में सैकड़ों की संख्या में लड्डू और मिठाइयां भोग लगाई जाती हैं। गोविंदा, गोपाला, मुरलीधर, बंसीधर जैसे श्रीकृष्ण के विभिन्न नामों का जाप किया जाता है।
दही-हांडी का आयोजन भी जन्माष्टमी की एक लोकप्रिय परंपरा है। इसमें ऊंचे स्थान पर मटके बांधकर उन्हें तोड़ने का प्रयास किया जाता है, जो कृष्ण के मथुरा में ग्वालों के साथ मक्खन चुराने की लीला का प्रतीक है। दही-हांडी को अक्सर स्थानीय स्तर पर खेलने का आयोजन किया जाता है।
देशभर में उत्साह
राजधानी दिल्ली के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और अन्य प्रमुख स्थानों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। मथुरा और वृंदावन में तो जन्माष्टमी को लेकर पूरे महीने उत्सव चलता है। पर्यटकों की बड़ी संख्या इन पवित्र स्थलों का रुख करती है।
महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार के मंदिरों में विशेष सजावट होती है। गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी धूमधाम से यह त्योहार मनाया जाता है। मंदिरों के अलावा घरों में भी बच्चों को कृष्ण वेश में सजाकर पूजा का आयोजन किया जाता है।
मनोरंजन और संस्कृति
जन्माष्टमी के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। नाटकों और भक्ति संगीत के कार्यक्रमों में श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया जाता है। टेलीविजन चैनलों पर विशेष कार्यक्रम प्रसारित होते हैं और सिनेमाघरों में कृष्ण से जुड़ी फिल्मों का प्रदर्शन होता है।
आज शाम से ही मंदिरों में जागरण का सिलसिला शुरू हो जाएगा और रातभर यह जारी रहेगा। मध्यरात्रि के बाद भक्तगण विशेष रूप से जन्म कीर्तन और आरती में शामिल होंगे। सुबह तक भोग वितरण होगा और प्रसाद ग्रहण करने वालों की भारी भीड़ उमड़ेगी।
हिंदू पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी को श्रावण कृष्ण अष्टमी के दिन मनाया जाता है। इस बार यह तिथि शुक्रवार को पड़ी है, जिसे शुभ माना गया है। आने वाले दिनों में भी इस पर्व की धार्मिक गतिविधियां जारी रहेंगी।



