कर्नाटक की राजनीति में हाल ही में एक ऐसा वाकया हुआ जिसने सबको चौंका दिया। 90 वर्षीय पूर्व अधिकारी येलप्पा रेड्डी ने राज्य सरकार के एक विधेयक के विरोध में एक शक्तिशाली आंदोलन खड़ा किया और अंततः मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।
दरअसल, कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक पार्क संरक्षण (संशोधन) विधेयक लाया था। इस विधेयक के तहत कुछ संशोधन प्रस्तावित किए गए थे जो पर्यावरण संरक्षण से जुड़े थे। रविवार को बेंगलुरु में 90 वर्षीय येलप्पा रेड्डी ने इस विधेयक के विरोध में एक बड़ी मार्च निकाली।
येलप्पा रेड्डी एक अनुभवी पूर्व सरकारी अधिकारी हैं जिन्होंने अपनी लंबी सेवा के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उनकी इस उम्र में भी पर्यावरण और सार्वजनिक हित के लिए आवाज उठाने की प्रवृत्ति ने कई लोगों को प्रभावित किया।
उनके इस आंदोलन का असर तुरंत दिखा। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इस संशोधन विधेयक को वापस ले लिया। यह कदम राज्य की राजनीति में एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है जहां एक बुजुर्ग नागरिक की मांग पर सरकार को अपना विधायी प्रस्ताव वापस लेना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना सरकार और नागरिकों के बीच संवाद की महत्ता को दर्शाती है। साथ ही यह भी दिखाती है कि लोकतंत्र में किसी भी उम्र के नागरिक का आवाज़ महत्वपूर्ण हो सकता है।
पार्क संरक्षण से जुड़े इस मुद्दे पर पर्यावरण प्रेमियों ने भी येलप्पा रेड्डी के समर्थन में अपनी राय व्यक्त की है। कई सामाजिक संगठनों ने इसे नागरिक शक्ति की एक मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया है।
कर्नाटक सरकार के इस फैसले से यह संदेश भी गया है कि सरकार नागरिकों की चिंताओं को गंभीरता से सुनती है। फिलहाल, यह विधेयक भविष्य में पुनः विचार के लिए रखा गया है और संबंधित हितधारकों से सुझाव मांगे जा रहे हैं।



