एक रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 पैसे की मजबूती हासिल की और यह 94.46 के स्तर पर पहुंच गया। यह जानकारी फॉरेक्स बाजार के सौदागरों के हवाले से सामने आई है।
बाजार सूत्रों के मुताबिक रुपये की इस मजबूती के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह और भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप को रुपये की ताकत का प्रमुख आधार बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इन्हीं स्थितियों के चलते स्थानीय मुद्रा को आने वाले दिनों में और स्थिरता मिलने की उम्मीद है।
फॉरेक्स कारोबारियों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक माहौल में भी रुपये की धारण क्षमता काबिले तारीफ रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया विभिन्न आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है। विश्लेषकों का कहना है कि केंद्रीय बैंक के निरंतर हस्तक्षेप से बाजार में अस्थिरता नियंत्रित रहती है और निवेशकों का भरोसा बना रहता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों में लगातार निवेश और समय पर हो रहे निर्यात से भी देश को अच्छी मात्रा में डॉलर प्राप्त हो रहे हैं, जिसका सीधा असर रुपये की स्थिति पर पड़ता है। फॉरेक्स बाजार के जानकारों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में रुपये की यही रफ्तार बरकरार रह सकती है, बशर्ते वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा उलटफेर न हो।
हालांकि विशेषज्ञ यह सावधानी भी जताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत रणनीति और भू-राजनीतिक स्थितियों का असर रुपये पर पड़ सकता है। ऐसे में रुपये की मजबूती को लेकर उत्साह के साथ सतर्कता भी जरूरी है।
बाजार सूत्रों ने यह भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में कुछ महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े आने वाले हैं, जो मुद्रा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। निवेशक इन आंकड़ों पर करीबी नजर रख रहे हैं।
गौरतलब है कि पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में रुपये की यह चाल मामूली तेजी का संकेत मानी जा रही है। फॉरेक्स डीलरों का कहना है कि मुद्रा बाजार में रोजाना उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब तक मूलभूत कारण मजबूत हों, रुपये की स्थिरता बनी रह सकती है।
फॉरेक्स बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक ने पिछले कुछ सत्रों के दौरान बाजार में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिसका सकारात्मक असर मुद्रा की स्थिरता पर देखने को मिला है। केंद्रीय बैंक के इस प्रयास को बाजार विशेषज्ञों ने रुपये की मजबूती का अहम कारण माना है।
विदेशी मुद्रा बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में भी केंद्रीय बैंक की निगरानी और विदेशी पूंजी प्रवाह की गति रुपये की दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे। निवेशकों और कारोबारियों को इन संकेतों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान में रुपये की स्थिति स्थिर बनी हुई है और कारोबारियों को उम्मीद है कि मजबूत आधारों की वजह से यह स्थिरता बरकरार रहेगी।



