कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्रों ने हाल ही में फिलिस्तीन के समर्थन में कुछ ग्रैफिटी लिखी थी, जिसका बचाव करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक पुराने बयान का सहारा लिया है।
जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने एक पोस्टर लगाया था जिसमें वाजपेयी जी का वह जाना-माना कथन अंकित था जिसमें उन्होंने अरब देशों से इजराइल द्वारा कब्जा की गई भूमि लौटाने और फिलिस्तीनी जनता के वैध अधिकारों की स्थापना की वकालत की थी।
इस विषय पर विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। कुछ शिक्षकों का मानना है कि राजनीतिक मुद्दों पर विश्वविद्यालय परिसर में इस तरह की गतिविधियां उचित नहीं मानी जा सकतीं, वहीं कुछ अन्य इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में देख रहे हैं।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष एक संवेदनशील विषय बना हुआ है। विभिन्न विश्वविद्यालय परिसरों में इस मुद्दे पर अलग-अलग राय देखी जाती रही हैं।
गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में विदेश नीति के संदर्भ में कई बार मध्य पूर्व की स्थिति पर अपने विचार व्यक्त किए थे। उनका यह बयान उसी परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
छात्रों का तर्क है कि पूर्व प्रधानमंत्री का यह कथन फिलिस्तीनियों के अधिकारों के प्रति सहानुभूति दर्शाता है और यह उनके विरोध प्रदर्शन का औचित्य सिद्ध करता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह ग्रैफिटी कब लिखी गई थी और इसकी सटीक समयसीमा क्या रही है।
विश्वविद्यालय परिसर में इस तरह की गतिविधियों को लेकर अक्सर बहस होती रही है कि शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक मुद्दों पर अभिव्यक्ति की सीमा कहां तक होनी चाहिए। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वविद्यालय एक ऐसा स्थान होना चाहिए जहां विभिन्न विचारों पर खुली चर्चा हो, वहीं कुछ अन्य इसे अनुशासनहीनता मानते हैं।
इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। आगे की कार्रवाई के बारे में भी अभी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।



