छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भारी बारिश ने एक बार फिर से ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं. सेमरिया गांव में पिछले कुछ दिनों से हो रही तेज बारिश के कारण गांव के रास्ते जलभराव और कीचड़ से पट गए हैं. मंगलवार को इसी भीषण पानी और कीचड़ के बीच ग्रामीणों को एक शव यात्रा निकालनी पड़ी, जो स्थानीय प्रशासन द्वारा बुनियादी ढांचे पर ध्यान न देने का प्रतीक बन गई.
बताया जाता है कि गांव के 30 से 40 लोगों को पानी में कमर तक डूबे हुए अर्थी को कंधा देना पड़ा. इस दौरान लोगों को न केवल पानी की भारी धारा का सामना करना पड़ा, बल्कि कीचड़ में फिसलने का खतरा भी था. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है, बल्कि हर बार की भारी बारिश में यही हालात होते हैं.
इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं और लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित हो रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समस्याओं का मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों और जल निकासी व्यवस्था की कमी है. सरकारी स्तर पर बजट का बड़ा हिस्सा शहरी विकास पर खर्च किया जाता है, जबकि ग्रामीण इलाकों की उपेक्षा जारी रहती है.
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वे स्थिति से अवगत हैं और जल्द ही समस्या के समाधान के लिए कदम उठाए जाएंगे. हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से यही बातें सुनाई जाती हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. अब जरूरत है कि सरकार ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर ध्यान दे और ऐसी स्थितियों को भविष्य में रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए.



