बॉम्बे हाई कोर्ट ने आज ओल्ड मॉंक के बोतलों पर गलत लेबल के मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया, जबकि महाराष्ट्र में इस ब्रांड की बिक्री पर प्रतिबंध अभी भी लागू है।
महाराष्ट्र सरकार ने 2024 में ओल्ड मॉंक पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे 2025 में कुछ शर्तों के तहत फिर से लागू किया गया। यह प्रतिबंध मुख्यतः शराब के सेवन से जुड़ी स्वास्थ्य चिंताओं और सामाजिक मुद्दों के कारण लगाया गया था।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि ओल्ड मॉंक के बोतलों पर “मसाला” या “फ्लेवर” जैसे शब्दों का प्रयोग उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं करता कि यह किस प्रकार का मसाला है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लेबल उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत गलत विज्ञापन के रूप में माना जा सकता है।
ओल्ड मॉंक के निर्माता ने इस निर्णय पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वे प्रतिबंध को लागू रखने के लिए तैयार हैं।
इस निर्णय के बाद, ओल्ड मॉंक के प्रशंसकों और व्यापारियों ने अपनी चिंताएँ व्यक्त की हैं। कुछ ने कहा कि यह प्रतिबंध उनके व्यापार पर असर डाल सकता है, जबकि अन्य ने स्वास्थ्य और सामाजिक कारणों से प्रतिबंध का समर्थन किया।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ओल्ड मॉंक अपने लेबल में बदलाव नहीं करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल महाराष्ट्र के लिए लागू है और अन्य राज्यों में प्रतिबंध अलग हो सकता है।
महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि वे प्रतिबंध को लागू रखने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे उपभोक्ताओं को सुरक्षित विकल्प प्रदान करने के लिए भी प्रयासरत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे ओल्ड मॉंक के साथ संवाद करने के लिए तैयार हैं।
इस निर्णय के बाद, ओल्ड मॉंक के प्रशंसकों और व्यापारियों ने अपनी चिंताएँ व्यक्त की हैं। कुछ ने कहा कि यह प्रतिबंध उनके व्यापार पर असर डाल सकता है, जबकि अन्य ने स्वास्थ्य और सामाजिक कारणों से प्रतिबंध का समर्थन किया।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ओल्ड मॉंक अपने लेबल में बदलाव नहीं करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल महाराष्ट्र के लिए लागू है और अन्य राज्यों में प्रतिबंध अलग हो सकता है।



