दक्षिण गुजरात के तटीय इलाकों में समुद्र का पानी लगातार आगे बढ़ रहा है और इसके साथ ही किसानों की ज़िंदगी भी दांव पर लग गई है। पिछले कुछ वर्षों में तटीय मिट्टी का इतना तेज़ी से कटाव हो रहा है कि खेतों और कुओं को समुद्र में समाने में ज़्यादा समय नहीं लग रहा।
BBC हिंदी से बात करते हुए स्थानीय किसानों ने बताया कि उनके पुरखों के खेत जो समुद्र से काफ़ी दूर थे, अब समुद्र की लहरें उन्हें छूने लगी हैं। एक किसान ने कहा, "पहले समुद्र हमारे गांव से काफ़ी दूर था, लेकिन अब हर साल पानी आगे बढ़ता जा रहा है। हमारे खेत और कुएं एक-एक कर समुद्र में समा रहे हैं।"
इलाके के लोगों का कहना है कि पहले समुद्र तट से कम से कम दो-तीन किलोमीटर दूर खेती होती थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। जहां पहले अनाज की खेती होती थी, वहां अब ज्वार की लहरें आने लगी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते समुद्र का स्तर बढ़ रहा है और तटीय इलाकों में यह असर साफ़ दिखाई दे रहा है। इसके अलावा, तटीय मिट्टी की प्रकृति भी ऐसी है कि यह आसानी से कटाव का शिकार हो जाती है।
स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम उठाए जाने की खबर नहीं है, जिससे ग्रामवासियों में चिंता बढ़ती जा रही है। एक बुज़ुर्ग ने कहा, "हमारे पास न कोई विकल्प है न कोई मदद। हम सिर्फ़ देख सकते हैं कि समुद्र हमारा सब कुछ ले जाता है।"
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस रफ़्तार से कटाव जारी रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र के कई गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। खेती की ज़मीन का लगातार कम होना न केवल किसानों के लिए बल्कि संपूर्ण क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा के लिए भी चिंताजनक है।
पर्यावरणविदों का सुझाव है कि तटीय क्षेत्रों में वृक्षारोपण और बांध निर्माण जैसे उपाय अपनाए जा सकते हैं, लेकिन इनके लिए सरकारी स्तर पर योजना और बजट की ज़रूरत होगी।
इस बीच, प्रभावित परिवार अपनी जीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई परिवारों ने अपने पुरखों की ज़मीन छोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं देखा है, जबकि कुछ अभी भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद कुछ हो जाए।



