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बॉक्स ब्रीदिंग: अमेरिकी सील कमांडो और इन्फ्लुएंसर्स द्वारा तनाव कम करने की विधि

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सांस लेना एक प्राकृतिक क्रिया है, परंतु इसे नियंत्रित करने के लिए विकसित की गई कुछ विधियाँ हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं। ऐसी ही एक विधि, जिसे "बॉक्स ब्रीदिंग" कहा जाता है, अमेरिकी सील कमांडो और कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स द्वारा तनाव कम करने के लिए उपयोग की जाती है। इस लेख में हम इस तकनीक के मूल सिद्धांतों और इसके लाभों को समझने के लिए विशेषज्ञों से बात करते हैं।

बॉक्स ब्रीदिंग, जिसे "स्क्वेयर ब्रीदिंग" भी कहा जाता है, एक चार-भाग वाली श्वसन विधि है। इसमें श्वास लेने, रोकने, श्वास छोड़ने और फिर से रोकने के चार चरण शामिल होते हैं, और प्रत्येक चरण को समान समय के लिए किया जाता है। यह विधि मूल रूप से सैन्य प्रशिक्षण में उपयोग की जाती थी, जहाँ सैनिकों को तीव्र परिस्थितियों में शांत और केंद्रित रहने की आवश्यकता होती है।

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, बॉक्स ब्रीदिंग का मुख्य उद्देश्य श्वसन दर को नियंत्रित करना और ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड के संतुलन को बनाए रखना है। जब हम गहरी और धीमी साँस लेते हैं, तो शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर घटता है। यह संतुलन स्वायत्त तंत्रिका तंत्र को स्थिर करने में मदद करता है, जिससे तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर कम होता है।

इन्फ्लुएंसर्स और फिटनेस कोच भी इस तकनीक को अपने दिनचर्या में शामिल करते हैं। वे इसे योग, ध्यान और पिलेट्स के साथ मिलाकर उपयोग करते हैं, ताकि मानसिक स्पष्टता और शारीरिक ऊर्जा दोनों को बढ़ाया जा सके। कई सोशल मीडिया पोस्ट में यह दिखाया जाता है कि कैसे एक मिनट की बॉक्स ब्रीदिंग से दिनभर की थकान और बेचैनी कम हो जाती है।

हमने इस विषय पर कुछ प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञों से बात की। डॉ. आर. शर्मा, एक न्यूरोलॉजिस्ट, ने बताया कि "बॉक्स ब्रीदिंग मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को सक्रिय करती है, जो निर्णय लेने और भावनात्मक नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि "इस तकनीक को नियमित रूप से अभ्यास करने से मस्तिष्क की प्लास्टिसिटी में सुधार होता है, जिससे तनाव के प्रति सहनशीलता बढ़ती है।"

एक अन्य विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक डॉ. प्रिया वर्मा, ने कहा कि "बॉक्स ब्रीदिंग का उपयोग अक्सर एग्ज़िट-इंटेंसिव ट्रेनिंग में किया जाता है, जहाँ व्यक्ति को अचानक शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह तकनीक न केवल शारीरिक श्वसन को नियंत्रित करती है, बल्कि मन को भी शांत करती है, जिससे व्यक्ति बेहतर निर्णय ले सकता है।" उन्होंने यह भी बताया कि "इस विधि को रोज़ सुबह या शाम को 5-10 मिनट के लिए अभ्यास करने से मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।"

सैन्य प्रशिक्षण के दौरान, सील कमांडो को यह तकनीक विशेष रूप से तब सिखाई जाती है जब वे उच्च तनाव वाले मिशनों पर होते हैं। यह उन्हें शारीरिक रूप से थकान महसूस करने के बावजूद मानसिक रूप से सतर्क रहने में मदद करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बॉक्स ब्रीदिंग का यह उपयोग उन्हें श्वसन के माध्यम से अपने शरीर को नियंत्रित करने की क्षमता देता है, जिससे वे कठिन परिस्थितियों में भी अपनी क्षमताओं को बनाए रख पाते हैं।

इन्फ्लुएंसर्स के बीच इस तकनीक की लोकप्रियता का एक कारण इसकी सरलता है। किसी भी स्थान पर, किसी भी समय, केवल चार चरणों का पालन करके, व्यक्ति अपनी श्वसन को नियंत्रित कर सकता है। इसके अलावा, यह विधि किसी भी उपकरण या विशेष स्थान की आवश्यकता नहीं रखती, जिससे यह रोज़मर्रा के जीवन में आसानी से समाहित हो जाती है।

हालाँकि बॉक्स ब्रीदिंग के लाभों के बारे में व्यापक रूप से चर्चा की जाती है, फिर भी यह याद रखना ज़रूरी है कि यह एक सहायक तकनीक है, न कि चिकित्सा उपचार का विकल्प। यदि किसी व्यक्ति को लगातार तनाव, चिंता या श्वसन संबंधी समस्याएँ हैं, तो उसे चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

इस तकनीक को अपनाने के लिए, निम्नलिखित चरणों का पालन किया जा सकता है:

  • साँस अंदर लें, 4 सेकंड तक गिनते हुए।
  • साँस रोकें, 4 सेकंड तक।
  • साँस बाहर छोड़ें, 4 सेकंड तक।
  • फिर से साँस रोकें, 4 सेकंड तक।
इस चक्र को 5-10 मिनट तक दोहराएँ।

स्रोत: BBC Hindi (https://www.bbc.com/hindi/articles/crl6xrd95r4o?at_medium=RSS&at_campaign=rss)

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