मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में इस बार जन्माष्टमी का पर्व विशेष माहौल में मनाया गया। जेल के अंदर श्रद्धा और उत्साह का ऐसा नजारा देखने को मिला, जो सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग था। महिला बंदियों के बीच छोटे-छोटे बच्चों की मासूमियत और उत्सव की चाह ने जेल की दीवारों के बीच भी खुशी का माहौल बना दिया।
इस विशेष अवसर पर जेल में रहने वाली मुस्कान की मात्र आठ माह की बेटी को राधा के रूप में सजाया गया। यह बच्ची जेल के अंदर ही पैदा हुई है और उसका नाम राधा रखा गया। मुस्कान 'नीले ड्रम हत्याकांड' की आरोपी है और अभी वह जेल में बंद है। उनकी इस छोटी बच्ची का जन्म जेल में हुआ है और वह अपनी मां के साथ महिला बंदियों के वार्ड में रहती है।
जन्माष्टमी समारोह के दौरान महिला बंदियों के साथ रह रहे चार बच्चों ने राधा-कृष्ण का भव्य रूप धारण किया। इन बच्चों ने परिधान पहनकर और सज-संवरकर कृष्ण जन्मोत्सव का प्रतीक बनकर सभी का मन मोह लिया। जेल प्रशासन ने इस कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से आयोजित कराया, जिससे बंदियों को भी पर्व का पूरा आनंद मिल सके।
कार्यक्रम की शुरुआत पूजा से हुई, जिसमें बच्चों और महिला बंदियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मंदिर में सजावट की गई थी और भगवान कृष्ण की मूर्ति के सामने श्रृंगार और फूलों से सजावट की गई थी। बच्चों ने मिलकर पूजा अर्चना की और सभी ने मिलकर जय श्री कृष्ण के नारे लगाए।
इसके बाद भजनों की प्रस्तुति हुई, जिसमें छोटे बच्चों ने कृष्ण के लीलाओं और जन्म कथा पर आधारित भजन सुनाए। महिला बंदियों ने भी भजनों में शामिल होकर वातावरण को और भी पवित्र बनाया। भजन संगीत की गूंज जेल के अंदर गूंजी और सभी ने एक स्वर में प्रभु का गुणगान किया।
समारोह का एक प्रमुख आकर्षण झांकी रही। बच्चों ने मिलकर कृष्ण जन्म की झांकी प्रस्तुत की, जिसमें वसुदेव और देवकी की कथा को दर्शाया गया। कंस के अत्याचार और कृष्ण के जन्म की कहानी को बच्चों ने बहुत ही सरल और मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। यह झांकी देखकर सभी भावुक हो गए और कई बंदियों की आंखों में आंसू आ गए।
कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण के साथ हुआ। महिला बंदियों और बच्चों में प्रसाद बांटा गया, जिसमें मिठाई और फल शामिल थे। सभी ने प्रसाद स्वीकार करते हुए एक-दूसरे को जन्माष्टमी की बधाई दी। जेल प्रशासन ने भी इस अवसर पर विशेष व्यवस्थाएं की थीं, ताकि बंदियों को इस पर्व का पूरा आनंद मिल सके।
जेल अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के आयोजन बंदियों के मनोबल को ऊंचा रखने और उन्हें सामान्य जीवन की याद दिलाने के लिए किए जाते हैं। इस अवसर पर जेल में रहने वाले परिवारों और बच्चों को भी शामिल किया जाता है, ताकि उन्हें भी त्योहारों का अहसास हो सके।
यह पहली बार नहीं है जब मेरठ जेल में इस तरह का आयोजन किया गया हो। पिछले वर्षों में भी विभिन्न धार्मिक पर्वों को जेल के अंदर मनाया जाता रहा है। जेल प्रशासन का मानना है कि इससे बंदियों में सकारात्मक सोच आती है और वे अपने जीवन में सुधार के प्रति अधिक सजग होते हैं।
जन्माष्टमी का यह उत्सव जेल की दीवारों के बीच भी मानवता और भक्ति की भावना का संदेश लेकर आया। मुस्कान की छोटी बच्ची राधा, जो जेल की दीवारों के बीच पैदा हुई है, ने अपनी मासूमियत से सभी का दिल जीत लिया। उसके राधा के रूप में सजने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुईं और लोगों ने उसे देखकर खुशी जाहिर की।
जेल सूत्रों के अनुसार, महिला बंदियों और उनके बच्चों के लिए यह एक यादगार दिन रहा। सभी ने मिलकर भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाया और आपस में बधाई का आदान-प्रदान किया। कार्यक्रम शांति और श्रद्धा के वातावरण में संपन्न हुआ।



