जिराम घाटी नरसंहार के 10 आरोपी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के न्यायालय ने दोषी पाया है। यह फैसला 5 सितंबर 2026 को दिल्ली के उच्च न्यायालय में सुनाया गया।
सभी दस आरोपी पर 2013 में जिराम घाटी में हुए माओवादी हमले के आरोप हैं। इस हमले में कई लोगों की जान गई और क्षेत्र में आतंक का माहौल बना रहा।
न्यायालय ने दलील दी कि सबूतों के आधार पर सभी आरोपी को दोषी ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में साक्ष्य स्पष्ट और पर्याप्त थे।
इस फैसले के बाद, जिराम घाटी के स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। वे आशा करते हैं कि इस निर्णय से क्षेत्र में शांति और स्थिरता लौटेगी।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता नहीं है और सभी आरोपी को सज़ा सुनाई जाएगी।
इस निर्णय के बाद, पुलिस और सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। वे सुनिश्चित कर रहे हैं कि ऐसे घटनाएँ फिर न हों।
जिराम घाटी के निवासियों ने कहा कि उन्हें लंबे समय से सुरक्षा की कमी महसूस हो रही थी। अब वे आश्वस्त हैं कि न्यायालय ने सही निर्णय लिया है।
इस फैसले के बाद, सरकार ने भी क्षेत्र में विकास कार्यों को तेज करने का वादा किया है। वे कहते हैं कि सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास भी ज़रूरी है।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि माओवादी गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखनी ज़रूरी है। NIA ने इस मामले में अपनी भूमिका निभाई और न्याय सुनिश्चित किया।



