गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु दुर्घटना, असामान्य परिस्थितियों में या अकाल होती है, तो उसका सामान्य रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार संभव नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में दिवंगत आत्मा की शांति और सद्गति के लिए 'नारायण बलि' का विशेष कर्मकांड किया जाता है।
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि अकाल मृत्यु के बाद 'नारायण बलि' क्यों जरूरी है। आइए जानते हैं इसके पीछे के कारणों को。
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु असामान्य परिस्थितियों में होती है, तो उसकी आत्मा को शांति नहीं मिलती है। ऐसे में 'नारायण बलि' का कर्मकांड करना जरूरी हो जाता है।
'नारायण बलि' के कर्मकांड में विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान किए जाते हैं। यह कर्मकांड दिवंगत आत्मा की शांति और सद्गति के लिए किया जाता है।
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि 'नारायण बलि' के कर्मकांड से दिवंगत आत्मा को शांति मिलती है और वह अपने अगले जन्म में अच्छे कर्मों के साथ जन्म लेती है।



